बेटियों के सवाल (Questions from Daughters )
देवी बनाकर पूजते हो हमें
कभी दुर्गा तो कभी काली कहते हो
क्यूँ पत्थर सा समझते रहते हो हमें ?
घर की इज़्ज़त कहते रहते हो हमें
फिर कभी स्वयमवर तो कभी द्यूत रचते हो
क्यूँ सरेआम नीलाम करते रहते हो हमें ?
लड़ पड़ते हो, जब कोई छेड़ देता है हमें
ख़ुद कभी लक्ष्मी तो कभी पराया धन कहते हो
क्यूँ बाज़ारू बनाते रहते हो हमें
परी, रानी कहते हो हमें
बड़े हो बेटी अपने घर चली जाएगी कहते हो
क्यूँ अपने होकर भी बेघर करते रहते हो हमें
फूल सी नाज़ुक है कहते हो
कभी पर्दा, कभी हिजाब में जकड़ रखते हो
क्यों इन रूढ़ियों से आज़ाद नहीं करते हो हमें
हम कामयाब हो जायँ तो अखरते हो
ये बेटी नहीं बेटा हैं, कहते फिरते हो
क्यूँ बेटियाँ ही नहीं रहने देते हो हमें ?
एहसान करते हो जो बेटों सा समझते हो
बेशक उन्हें अपने धन दे दो
बस हमारे हिस्से का प्यार क्यूँ नहीं दे देते हमें

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