माँ तुम कब आओगी
माँ तुम कब आओगी
माँ कल तुम चली गईं,इक आह सी दिल में छोड़ गईं
कुछ खामोश से बच्चे बैठे हैं ,
शयद सामानों में तुम अपने कुछ बचपन भी साथ समेट गईं
माँ कल तुम चली गईं,इक आह सी दिल में छोड़ गईं
कोलाहल से कटती थी शामें , हर बात पे होती थी चुहलाई
कुछ गूंगी दीवारें और साँसे हैं बस,
शायद सामानों में तुम अपने कुछ किलकारी साथ समेट गई
माँ कल तुम चली गईं,इक आह सी दिल में छोड़ गईं
इठलाती थी एक क्यारी कल तक शर्माती थी हर छुईमहुई
कुछ मुरझाये से पत्ते हैं शाखों पर
शायद सामानों पे अपने तुम वह बगिया भी साथ समेट गई
माँ कल तुम चली गईं,इक आह सी दिल में छोड़ गईं
ठाठ से झूला करते थे जिन पर राधा और कन्हाई
कुछ खिसियाये से लगते हैं नन्दलाल
शायद संदूकों में अपने वो झूले भी साथ समेट गईं
माँ कल तुम चली गईं,इक आह सी दिल में छोड़ गईं
लहराती थी अँगड़ाती अम्बर में बादल से करती थी हाथापाई
कुछ कटी पतंगें रखी हैं छत पे
शायद सामानों में अपने तुम वो मांझे की डोरी साथ समेट गई
माँ कल तुम चली गईं,इक आह सी दिल में छोड़ गईं
वादी में कुछ हलचल है , अफवाहें हैं पश्चिम से दुश्मन ने की है चढ़ाई
अरी को सबक सिखाने कुछ बच्चे प्रण करते हैं
माँ का चमन बचाने कुछ बच्चे चोला पहनते हैं
कवच बना रण छेड़ सके माँ ,
तुम एक चादर बसंती छोड़ गई
मौसम में कुछ खुश्की सी है
हिन्द का स्वर्ग सुरक्षित है
दिल्ली ने दी है बधाई
तिरंगों में लिपटी कुछ डोलियां आती हैं
कुछ तोपें सलामी देती हैं
कुछ बच्चे नारे लगाती हैं
कुछ माएं खामोश बैठी हैं
इस कविता का शीर्षक है "माँ तुम कब आओगी " ये हर एक बच्चे की खवाहिश है और इसका प्रेरणा श्रोत हैं वह बच्चे जो अपनी माँ से दूर हैं और ये जो शीर्षक है ये इस कविता में कभी नहींरिपीट होगी क्योंकि ये कविता एक ख्वाहिश है हर उस बच्चे की जो अपनी माँ से दूर है. (The title of this poem is “Mother, When Will You Come?” It reflects the heartfelt longing of every child who is separated from their mother. The inspiration behind this poem comes from those children who live far away from their mothers. And although this title holds the soul of the poem, it will never be repeated within the poem itself— because the poem is meant to express a wish, a quiet yearning, felt by every child waiting for their mother’s return.)
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